OnlyFans नहीं, सोच एक्सपोज हो रही है – बॉडी उनकी, कमाई उनकी… फिर भी जजमेंट हमारा?

Why Society Judges Women On OnlyFans But Ignores Men

सोशल मीडिया की दुनिया में कुछ प्लेटफॉर्म ऐसे होते हैं जिनका नाम लेते ही राय दो हिस्सों में बंट जाती है और OnlyFans उन्हीं में से एक है. कोई इसे महिलाओं के सशक्तिकरण का मंच मानता है, तो कोई इसे नैतिक गिरावट का प्रतीक बताता है. लेकिन इस बहस के बीच एक बड़ा सवाल बार-बार उठ रहा है कि क्या हम प्लेटफॉर्म को नहीं, बल्कि महिलाओं को जज कर रहे हैं?

यह समझना जरूरी है कि यह बहस नई नहीं है. harpersbazaar.com की रिपोर्ट के मुताबिक, OnlyFans को लेकर समाज में दो तरह की सोच है – एक जो इसे आर्थिक आज़ादी का जरिया मानती है और दूसरी जो इसे गलत नजरिए से देखती है. लेकिन दिलचस्प बात यह है कि आलोचना अक्सर महिलाओं पर ही केंद्रित होती है, जबकि इस इकोसिस्टम में पुरुष भी बराबर मौजूद हैं.

प्लेटफॉर्म कैसे काम करता है?

OnlyFans एक सब्सक्रिप्शन-बेस्ड प्लेटफॉर्म है जहां क्रिएटर्स अपने कंटेंट के बदले पैसे कमाते हैं. यूजर्स मासिक सब्सक्रिप्शन, टिप्स और पेड कंटेंट के जरिए भुगतान करते हैं. क्रिएटर्स को अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा मिलता है, प्लेटफॉर्म लगभग 20% कमीशन लेता है और लाखों लोग इससे जुड़कर अपनी आय बना रहे हैं. यानी यह सिर्फ “एडल्ट कंटेंट” का प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि एक डिजिटल बिजनेस मॉडल है.

फिर विवाद महिलाओं के नाम पर ही क्यों?

सबसे बड़ा सवाल यही है – जब पुरुष भी इस प्लेटफॉर्म पर कंटेंट बनाते हैं, तो आलोचना सिर्फ महिलाओं तक सीमित क्यों रहती है? समाज में लंबे समय से यह धारणा रही है कि महिलाओं के शरीर और उनके फैसलों पर नियंत्रण होना चाहिए. पुरुष अगर वही काम करें तो “चॉइस”, महिला करे तो “करेक्टर जजमेंट.” यही डबल स्टैंडर्ड इस पूरी बहस की जड़ है.

CEO की नजर से OnlyFans

OnlyFans की CEO Keily Blair खुद मानती हैं कि यह प्लेटफॉर्म “कन्वर्सेशन स्टार्टर” है. यानी लोग इसके बारे में सुनते ही सवाल पूछते हैं.
उनके मुताबिक ”प्लेटफॉर्म सिर्फ एक माध्यम है, असली मुद्दा समाज की सोच है. हर कोई इसे पसंद करे, यह जरूरी नहीं.” लेकिन आलोचना का टारगेट अक्सर गलत दिशा में चला जाता है.

क्या यह सच में ‘सशक्तिकरण’ है?

यह सवाल भी अक्सर उठता है – क्या OnlyFans महिलाओं को सशक्त बनाता है? अगर देखा जाए तो इस प्‍लैटफॉर्म से महिलाएं अपनी शर्तों पर कमाई कर रही हैं, बिचौलियों की जरूरत खत्म हो रही है और कंटेंट और आय पर कंट्रोल खुद के पास है. लेकिन दूसरी तरफ सोशल जजमेंट का दबाव, ऑनलाइन ट्रोलिंग, साथ में सुरक्षा और प्राइवेसी के खतरे. यानी यह पूरी तरह काला या सफेद नहीं, बल्कि ग्रे एरिया है.

सुरक्षा और नियमों पर क्या है स्थिति?

OnlyFans ने पिछले कुछ सालों में अपने नियम सख्त किए हैं:

  • 18+ आयु सत्यापन अनिवार्य
  • कंटेंट मॉडरेशन के लिए बड़ी टीम
  • अवैध या खतरनाक कंटेंट पर रोक
  • यूजर सेफ्टी पर खास ध्यान

इसके बावजूद आलोचना खत्म नहीं हुई – क्योंकि समस्या सिर्फ प्लेटफॉर्म नहीं, धारणा भी है.

समाज का ‘डबल स्टैंडर्ड’ कैसे काम करता है?

अगर गहराई से देखें तो यह मुद्दा सिर्फ OnlyFans का नहीं है, बल्कि एक बड़े सामाजिक पैटर्न का हिस्सा है. उदाहरण के लिए फिल्मों में ग्लैमर स्वीकार्य है लेकिन सोशल मीडिया पर उसी कंटेंट से विवाद हो जाता है. पुरुष उपभोक्ता, महिला कंटेंट और जजमेंट सिर्फ महिला पर. यानी जिम्मेदारी का बंटवारा बराबर नहीं है.

क्या OnlyFans सिर्फ एडल्ट कंटेंट है?

बहुत कम लोग जानते हैं कि फिटनेस ट्रेनर्स, शेफ, कॉमेडियन और म्यूजिक आर्टिस्ट भी इस प्लेटफॉर्म पर कमाई कर रहे हैं. लेकिन इसकी पहचान अब भी एक ही चीज से जुड़ी हुई है और यही इसकी सबसे बड़ी इमेज समस्या है.

महिलाओं की महत्वाकांक्षा क्यों खटकती है?

एक और दिलचस्प एंगल यह है कि जब महिलाएं खुलकर पैसे कमाने और अपनी महत्वाकांक्षा की बात करती हैं, तो समाज असहज हो जाता है.
Ambitious woman को अलग नजर से देखा जाता है. पुरुष की सफलता से प्रेरणा और महिला की सफलता पर सवाल, OnlyFans की बहस में यह मानसिकता साफ नजर आती है.

आखिर समाधान क्या है?

इस पूरे मुद्दे का हल सिर्फ प्लेटफॉर्म बदलना नहीं, बल्कि सोच बदलना है. जजमेंट से पहले समझ, महिलाओं के फैसलों का सम्मान और डिजिटल प्लेटफॉर्म को न्यूट्रल नजर से देखना जरूरी है. OnlyFans को लेकर बहस जारी रहेगी और होनी भी चाहिए. लेकिन अगर हर बार निशाना सिर्फ महिलाएं बनती हैं, तो यह बहस अधूरी रह जाएगी. असल सवाल यह नहीं है कि OnlyFans सही है या गलत. असल सवाल यह है कि हम महिलाओं को उनके फैसलों के लिए क्यों जज करते हैं, जबकि वही काम पुरुष करें तो चुप रहते हैं?