हमारे देश यानी भारत में एक कहावत है, शादी का लड्डू जो खाए सो पछताए जो ना खाए वो भी पछताए. जापान की महिलाओं पर यह कहावत सटीक बैठती मालूम पड़ती है. जी हां, दुनिया भर में यह धारणा बनती जा रही है कि जापान में लोगों का रोमांस और शादी से भरोसा उठता जा रहा है. देर से शादी करना, कम डेटिंग करना और सिंगल रहना – ये सब ट्रेंड अब आम हो चुके हैं.
japantoday.com में छपी रिपोर्ट के अनुसार ऐसे में एक नया सर्वे सामने आता है, जिसमें दावा किया जाता है कि जापान की ज्यादातर शादीशुदा महिलाएं अपने पति से शादी करने पर पछता रही हैं – तो यह खबर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होना लाजमी था.
लेकिन क्या सच्चाई सच में इतनी सीधी है? या इसके पीछे एक और कहानी छिपी है?
रिपोर्ट क्या कहती है?
रिपोर्ट के अनुसार, Presia नाम की एक कंपनी द्वारा किए गए सर्वे में 20 से 59 साल की 287 शादीशुदा जापानी महिलाओं से सवाल पूछा गया – “क्या आपको अपने पति से शादी करने का पछतावा है?” जवाब चौंकाने वाला था : 70% महिलाओं ने कहा – हां, पछतावा है, वहीं 54% ने कहा कि अगर मौका मिले तो वे दोबारा उसी व्यक्ति से शादी नहीं करेंगी. यह आंकड़े सुनकर ऐसा लगता है जैसे जापान में शादी की संस्था ही संकट में है.
पछतावे की सबसे बड़ी वजह – प्यार नहीं, पैसा
जब महिलाओं से पूछा गया कि उन्हें किस बात का पछतावा है, तो जो जवाब सामने आए, उन्होंने एक अलग ही कहानी बयां की. 22.6% महिलाओं ने कहा – पति की कम आय को स्वीकार करना उनकी गलती थी. 14.6% ने कहा कि उन्हें पति की आर्थिक समझ पर ज्यादा सख्त होना चाहिए था. वहीं 11.1% ने कहा कि घर के काम में सहयोग की कमी एक बड़ी समस्या है.
दिलचस्प बात यह रही कि 36.6% महिलाओं ने कहा – पति की शक्ल-सूरत से उन्हें कोई शिकायत नहीं है. यानी साफ है कि समस्या “लुक्स” नहीं, “लाइफस्टाइल और जिम्मेदारी” है.
क्या सच में खत्म हो रहा है रोमांस?
पहली नजर में यह रिपोर्ट यही संकेत देती है कि प्यार अब रिश्तों में सबसे जरूरी चीज नहीं रह गया. लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती. सर्वे में बड़ा ट्विस्ट छिपा है. यह सर्वे जिस कंपनी ने किया – Presia, वह एक मैट्रीमोनियल/मैचमेकिंग सर्विस है. यानी जो लोग पहले से शादी में खुश हैं , वे इस तरह के प्लेटफॉर्म पर कम आते हैं. लेकिन जो लोग अपने रिश्ते से असंतुष्ट हैं वे ज्यादा सक्रिय होते हैं. इसका मतलब यह हुआ कि सर्वे का सैंपल पहले से ही “नाखुश लोगों” की तरफ झुका हो सकता है.
तो असली तस्वीर क्या है?
अगर इस एंगल से देखें, तो यह सर्वे यह नहीं कह रहा कि “जापान की हर महिला शादी से नाखुश है.” बल्कि यह दिखाता है कि जो लोग पहले से असंतुष्ट हैं, उनके लिए सबसे बड़ी समस्या आर्थिक और व्यवहारिक मुद्दे हैं.
रिश्तों में प्यार क्यों पीछे छूट रहा है?
आधुनिक रिश्तों में एक बड़ा बदलाव यह है कि लोग सिर्फ “इमोशनल कनेक्शन” से संतुष्ट नहीं हैं. उन्हें चाहिए आर्थिक स्थिरता, बराबरी और सहयोग. अगर ये चीजें नहीं मिलतीं, तो प्यार भी धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगता है.
क्या यह सिर्फ जापान की समस्या है?
नहीं. यह ट्रेंड अब दुनिया के कई देशों में देखा जा रहा है. लोग देर से शादी कर रहे हैं, रिश्तों में expectations बढ़ गई हैं और emotional satisfaction के साथ-साथ practical life भी उतनी ही जरूरी हो गई है.
शादी के बाद असली चुनौती शुरू होती है
यह सर्वे एक और सच्चाई दिखाता है कि शादी करना आसान है लेकिन उसे निभाना मुश्किल, क्योंकि रोजमर्रा की जिम्मेदारियां, पैसे का दबाव, काम और घर का संतुलन- ये सब धीरे-धीरे रिश्ते पर असर डालते हैं.
सर्वे से क्या सीख मिलती है?
इस सर्वे की रिपोर्ट से कुछ बड़ी बातें निकलकर सामने आती हैं. सिर्फ प्यार के आधार पर शादी करना काफी नहीं. आर्थिक और व्यवहारिक समझ भी जरूरी है. और सबसे जरूरी – शादी से पहले expectations साफ होना चाहिए.
जापान का यह सर्वे भले ही चौंकाने वाला लगे, लेकिन यह एक गहरी सच्चाई की तरफ इशारा करता है कि रिश्ते सिर्फ इमोशन पर नहीं टिकते, उन्हें जिम्मेदारी, समझ और संतुलन की भी जरूरत होती है. और शायद यही वजह है कि आज की पीढ़ी शादी को लेकर पहले से ज्यादा सोच-समझकर फैसला ले रही है.