अमेरिका के Bellevue शहर से सामने आया ‘OnlyFans मैनशन’ केस अब सिर्फ एक क्राइम स्टोरी नहीं, बल्कि डिजिटल युग की सबसे खतरनाक हकीकत बनकर उभरा है. आरोप है कि एक आलीशान घर के अंदर युवतियों और किशोरियों को बंद करके उनसे जबरन ऑनलाइन एडल्ट कंटेंट बनवाया जाता था. बाहर से यह जगह एक लग्ज़री पार्टी हाउस लगती थी, लेकिन अंदर चल रहा था डर, हिंसा और दबाव का खेल.
seattletimes.com की रिपोर्ट और कोर्ट में पेश दस्तावेजों के आधार पर इस पूरे मामले से जुड़े सनसनीखेज खुलासे सामने आए हैं, जिनमें पीड़ित महिलाओं के बयान और पुलिस जांच के कई अहम पहलू शामिल हैं.
21 साल का ‘किंगपिन’: कौन है आरोपी?
इस पूरे नेटवर्क के केंद्र में 21 साल का निकिता ट्यूकालो बताया जा रहा है, जिस पर ह्यूमन ट्रैफिकिंग, मनी लॉन्ड्रिंग और संगठित अपराध चलाने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं. पुलिस का कहना है कि वह न सिर्फ इस पूरे ऑपरेशन को चला रहा था, बल्कि महिलाओं को कंट्रोल करने के लिए हिंसा और डर का खुलकर इस्तेमाल करता था. प्रॉसिक्यूटर्स के अनुसार, यह कोई एक-दो लोगों का मामला नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क था, जिसमें कई सहयोगी भी शामिल हो सकते हैं.
3 मिलियन डॉलर का ‘मैनशन’, अंदर था टॉर्चर सिस्टम
जिस घर से यह पूरा ऑपरेशन चल रहा था, उसकी कीमत करीब 30 लाख डॉलर (करीब 25 करोड़ रुपये) से ज्यादा बताई जा रही है. यह एक बड़ा और आलीशान मैनशन था, जहां से कंटेंट प्रोडक्शन का पूरा नेटवर्क ऑपरेट होता था. लेकिन जांच में सामने आया कि यही मैनशन महिलाओं के लिए एक तरह का कैदखाना बन चुका था, जहां से निकलना आसान नहीं था.
20 घंटे काम, नींद भगाने के लिए ड्रग्स
पीड़ित महिलाओं ने पुलिस को बताया कि उनसे रोजाना 10 से 20 घंटे तक काम करवाया जाता था. यह सिर्फ कंटेंट बनाना नहीं, बल्कि लगातार लाइव चैट, वीडियो और इंटरैक्शन का दबाव था. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि उन्हें जागते रहने के लिए Adderall जैसी दवाएं दी जाती थीं – ताकि वे लंबे समय तक काम कर सकें. यानी यह मामला सिर्फ शोषण नहीं, बल्कि हेल्थ के साथ भी गंभीर खिलवाड़ था.
विरोध किया तो बंदूक, मारपीट और धमकी
कोर्ट में दर्ज आरोपों के मुताबिक, आरोपी महिलाओं के साथ बेहद क्रूर व्यवहार करता था. उन्हें पीटा जाता, बाल खींचकर जमीन पर गिराया जाता और कई बार उनके सिर पर बंदूक तान दी जाती थी. एक महिला ने बताया कि उसे इतनी बुरी तरह डराया गया कि उसे अपनी जान का खतरा महसूस होने लगा. “मैंने सब कुछ इसलिए किया क्योंकि मुझे लगा कि मुझे मार दिया जाएगा,” उसने पुलिस को बताया.
17 साल की उम्र से फंसाने का आरोप
इस केस का सबसे गंभीर पहलू यह है कि कुछ पीड़िताओं ने दावा किया कि उनसे संपर्क तब किया गया जब वे सिर्फ 17 साल की थीं. उन्हें बड़े पैसे का लालच देकर इस नेटवर्क में जोड़ा गया और 18 साल की उम्र होते ही उनसे एडल्ट कंटेंट बनवाना शुरू कर दिया गया. यह साफ तौर पर बताता है कि यह नेटवर्क नाबालिगों तक पहुंच बना चुका था.
लाखों की कमाई, लेकिन लड़कियों को नहीं मिला हक
आरोप है कि इस नेटवर्क के जरिए हर महीने करीब 2 लाख 60 हजार डॉलर (लगभग 2 करोड़ रुपये) तक की कमाई होती थी. लेकिन जिन लड़कियों के दम पर यह पैसा बन रहा था, उन्हें बहुत कम हिस्सा दिया जाता था. कई पीड़िताओं ने बताया कि उन्हें सिर्फ 1000 डॉलर के आसपास पैसे मिलते थे, जबकि असली कमाई आरोपी अपने पास रखता था.
अकाउंट्स का पूरा कंट्रोल आरोपी के पास
जांच में यह भी सामने आया कि सभी ऑनलाइन अकाउंट्स के पासवर्ड आरोपी के पास होते थे. यानी महिलाओं को यह तक नहीं पता होता था कि उनकी कमाई कितनी हो रही है. यह पूरी तरह से आर्थिक और डिजिटल कंट्रोल का मामला बन जाता है, जहां पीड़ित पूरी तरह आरोपी पर निर्भर हो जाते थे.
भागने की कोशिश की तो सड़क पर छोड़ दिया
एक और चौंकाने वाली घटना में, जब एक महिला ने यह काम छोड़ने की कोशिश की, तो आरोपी ने उसका सारा सामान उठाकर बाहर फेंक दिया और उसे सड़क पर अकेला छोड़ दिया. यह दिखाता है कि इस नेटवर्क से बाहर निकलना कितना मुश्किल और खतरनाक था.
पुलिस रेड में क्या मिला?
जब पुलिस ने 4 जून को इस मैनशन पर छापा मारा, तो वहां से 300 से ज्यादा मोबाइल फोन और 50 लैपटॉप बरामद किए गए. ये सभी डिवाइसेज़ कंटेंट बनाने और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से जुड़ने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे थे. इसके अलावा, बैंक अकाउंट्स और चेक्स में लाखों डॉलर की रकम भी मिली.